
इस तस्वीर में वो मुक़द्दस मक़ाम दिखाया गया है जहाँ हज़रत जिब्रील अलैहिसलाम ने हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) को नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा सिखाया था। अल रहमान उमराह टूर्स के साथ, आपको मक्का शरीफ़ के ऐसे रूहानी मक़ामात की ज़ियारत करने का मौका मिलता है। हमारे उमराह पैकेजेस में इन तारीखी जगहों को शामिल किया गया है।
मूसल्लह जिब्रील की हक़ीक़त
खाना काबा के दरमियान संगमरमर के आठ टुकड़ों से बने इस पत्थर को ‘मूसल्लह जिब्रील’ कहा जाता है। यही वो बरकती जगह है जहाँ नमाज़ की इब्तिदा हुई थी। अल रहमान उमराह टूर्स अपने मेहमानों को इस मुक़द्दस मक़ाम की मालूमात और ज़ियारत कराता है। बेहतरीन उमराह पैकेजेस के लिए आज ही हमसे राब्ता करें।

इस्लाम का पहला सुतून (नमाज़)
यह तस्वीर उस वाक़ये को बयां करती है जब हज़रत जिब्रील (अ.) ने मुसलसल दो दिन हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) को नमाज़ पढ़ाई। ये वो पुर-असरार और यादगार लम्हात थे जिन्होंने इस्लाम के पहले सुतून (नमाज़) के लिए रहनुमा उसूल क़ायम किए। कानपुर से उमराह पर जाने के लिए अल रहमान टूर्स पर भरोसा करें

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि.) की रिवायत
तस्वीर में अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि.) की रिवायत का ज़िक्र है, जिसमें हदीस की रौशनी में नमाज़ के औक़ात (समय) की वजाहत की गई है। हम अपने टूर में ज़ियारत के साथ-साथ इन मुक़द्दस रिवायतों को समझने का मौक़ा भी देते हैं।

नमाज़ का औक़ात-ए-करीमा
इस तस्वीर में नमाज़ के सही वक़्त की अहमियत बताई गई है। यह वही वक़्त है जो अंबिया-ए-इकराम ने देखा था। अल रहमान उमराह टूर्स का मक़सद सिर्फ सफ़र कराना नहीं, बल्कि आपके इस सफ़र को रूहानी तौर पर मुकम्मल करना है। हमारे कानपुर के उमराह पैकेजेस में रूहानियत का खास ख्याल रखा जाता है।

मैरी स्टोन की नायाब शान
मूसल्लह जिब्रील’ का मार्बल जिसे ‘मैरी स्टोन’ कहा जाता है, दुनिया के नायाब पत्थरों में शुमार है। इसे खलीफा अबु जफ़र अल मंसूर ने तोहफ़े में दिया था। ऐसे नायाब और तारीखी मक़ामात की ज़ियारत के लिए अल रहमान उमराह टूर्स कानपुर के सबसे भरोसेमंद टूर्स में से एक है।
