मक़बूल उमराह (Maqbool Umrah), सही तरीका (Sahi Tarika), अल रहमान उमराह टूर्स (Al Rahman Umrah Tours), कानपुर (Kanpur), उमराह पैकेज (Umrah Packages)

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Maqbool Umrah Karne Ka Sahi Tareeqa | Al Rahman Umrah Tours

उमराह का मफ़हूम (Umrah ka Mafhoom)

उमराह का लफ़्ज़ इतमार से आया है, जिसका माईना है ज़ियारत करना. इस्लाम में उमराह मक्का मुकर्रमा में काबा की खुसूसी ज़ियारत की तरह है. हज़रत मुहम्मद ﷺ की तालीमात पर अमल करते हुए और हज मख़सूस अय्याम में अदा करा जाता है. उमराह साल के किसी भी वक़्त में अदा करा जा सकता है. ये अमल अल्लाह से अक़ीदत ज़ाहिर करने का एक बेहतरीन अमल है.

उमराह का तरीका चार बुनियादी सुतूनों पर मुश्तमिल है: [1] ऐहराम, [2] तवाफ़, [3] सई, [4] हलक़

ऐहराम बांधना (Ihram Bandhna), मीक़ात (Miqat), हुज्जाज (Hujjaj), ज़ुलहुलेफा (Dhul-Hulayfah), दम देना (Dam Dena)

ऐहराम में दाखिल होना. हुज्जाज को मीक़ात पार करने से पहले ऐहराम बांधना ज़रूरी है, मीक़ात के पाँच मक़ामात है, ज़ुलहुलेफा, ज़ारक, अल मनाज़िल, यलमलम और रबीग.

अगर आप ऐहराम बांधे बगैर मीक़ात से गुज़रे तो आप को वापस जाना होगा और फिर वहां ऐहराम बांधना होगा, ऐसा ना करने पर उमराह के ऐहकाम की खिलाफवर्ज़ी होगी और दम देना पड़ेगा.

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नियत करना (Niyyah karna), तल्बियह (Talbiyah), वाजिब (Wajib), हालत ए ऐहराम (Halat-e-Ihram)

उमराह की नियत करना. उमराह के ज़ायरीन को उमराह करने के लिए साफ़ नियत करनी चाहिए, नियत को ज़बान से कहने की ज़रुरत नहीं होती बल्कि नियत दिल से करना चाहिए.

जब आप मीक़ात के करीब हो तो ऐहराम और उमराह की नियत करें और तल्बियह पढ़ें, तल्बियह पढ़ना वाजिब है और ये हालात ए ऐहराम में दाखिल होने की नियत को दुरुस्त करता है.

तवाफ़ करना (Tawaf karna), इत्तिबा (Idtiba), एहराम की चादर (Ihram ki Chadar), दायाँ कंधा (Dayan Kandha)

तवाफ़ करना. तवाफ़ का मतलब है काबा के सात बार चहल कदमी करना. जब आप मताफ़ में हो तो सुन्नत के मुताबिक़ इत्तिबा यानी दाहिने कंधे को खोलने का अमल करें, ये आप के ऐहराम की चादर के ऊपरी हिस्से को अपनी दाएं बाज़ू के नीचे से पास कर के लटका कर करा जा सकता है, पूरे तवाफ़ में अपने दाएं कंधे को खोले रखे.

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हज़रे अस्वद (Hajar-e-Aswad), खाना काबा (Khana Kaaba), रमल (Raml), दुआ (Dua), ज़मज़म (Zamzam)

तवाफ़ का तरीका आग़ाज़ खाना काबा का वो गोशा है जहाँ हज़रे अस्वद को रखा गया है, अपने दाएँ तरफ हज़रे अस्वद के साथ काबा की तरफ मुँह कर के खड़े हो, ये वो जगह है जहाँ आप तवाफ़ करने की नियत करेंगे.

पहले तीन चक्करो में मर्द रमल करेंगे (तेज़ी से चलना) और औरतें मामूली की रफ़्तार से चलेंगी हर चक्कर के बाद हज़रे अस्वद की तरफ मुँह कर के बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर कहते हुए अपनी लिए दुआ करें.

सातों चक्कर के बाद 2 रकत नमाज़ पढ़ेंगे, नमाज़ के बाद फिर ज़मज़म पिएंगे जैसे की हज़रत मुहम्मद ﷺ ने इरशाद फ़रमाया था.

सई करने का तरीका (Sa’ee karne ka tarika), सफ़ा और मरवा (Safa aur Marwa), पहाड़ियों (Pahadiyon)

सई करने का तरीका. उमराह में सई एक लाज़मी मरहला है, सीधे अल्फ़ाज़ में ये कहा जाए की सफा और मरवा की पहाड़ियों के दरमियान सात बार चलना होता है, सई के दौरान ज़ायरीन दो पहाड़ियों के दरमियान सात बार चलते हैं या दौड़ते हैं और ये सफा से शुरू हो कर मरवा पर खत्म होते हैं

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हरी रंग की रौशनी (Hari rang ki roshni), रफ़्तार (Raftar), दुआ या ज़िक्र (Dua ya Zikr), दुरूद (Durood)

सफ़ा और मरवा की पहाड़ियों के दरमियान, सफा से शुरू कर के मरवा की तरफ पैदल चलना होगा, दरमियान में हरी रंग की रौशनी जो 50 मीटर के फासले पर मौजूद है, इन हरी रंग की रौशनी के दरमियान मर्द हज़रात को रफ़्तार से चलना है लेकिन ख़वातीन को अपनी मामूली की रफ़्तार से चलना है.

सई करने वाले ज़ायरीन के लिए कोई ख़ास दुआ या ज़िक्र मशरू नहीं किया गया है, आप अपनी पसंद की कोई दुआ पढ़ सकते हैं, जैसे की हज़रत मुहम्मद ﷺ पर दुरूद भेज सकते हैं.

बाल मुंडवाना (Baal Mundwana), हलक़ या तकसीर (Halq ya Taqsir), उमराह मुकम्मल (Umrah Mukammal)

बाल मुंडवाना और तरशवाना. सई के बाद ज़ायरीन को हलक़ या तकसीर कराना पड़ता है, हलक़ से मुराद हुज्जाज के लिए सर मुंडवाना है और जब की तकसीर का मतलब है ख़वातीन हुज्जाज को बाल तरशवाना है.

हलक़ और तकसीर की तकमील के बाद आप ऐहराम की हालत से बहार हो सकते हैं, इसलिए की आपका उमराह मुकम्मल हो गया है.

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